अजय सिंह की नई कहानी “तुम प्रेम में वर्चस्व चाहती हो और मैं आज़ादी” मौजूदा फासीवादी समय को प्रेम-यौन संबंधों की पेचीदगियों से मुठभेड़ करती है। इसमें राजनीति से लेकर पितृसत्ता की जकड़न कैसे रूप धरती है इस पर बारीक विमर्श मौजूद है।
गुलमोहर किताब के कहानी पाठ कार्यक्रम की शुरुआत लेखन अध्यापक लालिमा सिंह की उपलब्धि पर चर्चा से हुई। उनकी किताब ‘प्यार की बंजारन तलाश’ गुलमोहर किताब से 2025 में प्रकाशित हुई। किताब की वजह से वह पिछले 30 साल से बिछड़े अपने बेटे से मिल पाईं।
इसके बाद अजय सिंह ने इस डिस्क्लेमर के साथ कहानी पढ़ना शुरू किया कि ‘यह रचना व्यस्कों के लिए है।’ कहानी स्त्री बुद्धिजीवी पुरुष बुद्धिजीवी के बीच घूमती है। उनके प्रेम संबंधों-यौन संबंधों में खटास वर्चस्व के संघर्ष में गुंथी कहानी मौजूदा निजाम पर तीखे कटाक्ष करती है।
कहानी पाठ का आयोजन सफाई कर्मचारी आंदोलन के सचिवालय ईस्ट पटेल नगर नई दिल्ली में 3 जनवरी 2026 को किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित श्रोताओं ने कहानी पाठ के पश्चात अपनी-अपनी राय दी।
लालिमा सिंह ने कहा – ‘कहानी मौजूदा दौर को बखूबी रेखांकित करती है। कहानी यह दर्शाती है कि मौजूदा दौर में स्त्री-पुरुष संबंध कितने जटिल और कठिन हो गए हैं। कहानी में वर्चस्व और आज़ादी को लेकर द्वंद्व है।’
नाटककार राजेश कुमार ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि- ‘कहानी मौजदूा दौर के राजनीतिक परिदृश्य की है। इसमें स्त्री-पुरुष प्रेम और यौन संबंधों को लेकर स्त्री बुद्धिजीवी और पुरुष बुद्धिजीवी में बहस दी गई है। कहानी कहने का अंदाज नया है।’
लेखक और प्रोफेसर बजरंग बिहारी तिवारी ने कहा कि यह कहानी मौजूदा दौर में राजनीति और स्त्री और पुरुष के संबंधों का दर्शाती है। कहानी में इस बात की गूंज है कि पर्सनल इज पोलिटिकल।’
राज वाल्मीकि ने कहा कि ‘इस कहानी की भाषा शैली बहुत अच्छी है। एक सिटिंग में पढ़ी जा सकती है। इसमें मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य का जीवंत चित्रण किया गया है। कहानी में स्त्री पुरुष प्रेम और यौन संबंधों पर बहस है।’
मुकुट बिहारी राठौर ने कहा कि कहानी के दो भाग हैं। इसमें पहले भाग में मौजूदा फासीवाद जैसे दौर का अच्छा वर्णन है। दूसरे में स्त्री पुरुष संबंधो की बहस है जो वह ठीक से समझ नहीं पाए।
सफाई कर्मचारी आंदोलन के राष्ट्रीय संयोजक बेजवाड़ा विल्सन ने कहा कि यह एक पोलिटिकल कहानी है। मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य का स्त्री पुरुष संबंधों पर किस प्रकार असर पड़ता है। इसे कहानी में दिखाया गया है।’
सामाजिक कार्यकर्ता सुलेखा ने कहा कि ‘इस कहानी में वर्तमान समय के राजनीतिक परिदृश्य का जीवंत चित्रण किया गया है। स्त्री पुरुष संबंधों पर विस्तार से बहस है।’
पत्रकार कवि-शायर मुकुल सरल ने कहा कि ‘कहानी सामयिक और नये अंदाज में कही गई है। जो उद्धरण कहानी की शुरुआत में दिए गए हैं वे कहानी के बीच-बीच में भी दिए जा सकते थे। दूसरी बात कि स्त्री-पुरुष प्रेम और यौन संबंध में जो बहस की गई है उसमें और विस्तार कर वर्चस्व और आजादी को दोनों पात्रों से कहलवाया जा सकता था। आज के राजनीतिक परिदृश्य को रेखांकित करती यह एक महत्वपूर्ण कहानी है।’
पत्रकार, लेखक और यूट्यूबर भाषा सिंह ने कहा कि कहानी मौजूदा दौर को बखूबी दर्शाती है। स्त्री के प्रति प्रेम और यौनिकता के बारे में पितृसत्तावादी नजरिए पर सवाल उठाती है। इस दौर की यह महत्वपूर्ण कहानी है।
लेखक अजय सिंह ने अपने वक्तव्य में कहा कि मैं इस कहानी के माध्यम से मौजूदा दौर के राजनीतिक माहौल और उसके वर्तमान स्त्री पुरुष प्रेम और यौन संबंधो पर होने वाले प्रभाव की ओर ध्यान आकर्षित करना चाहता था। उन्होंने कहा कि इस कहानी को लिखने में मुझे ढाई वर्ष का समय लगा और काफी उधेड़-बुन के बाद लिख पाया।
(राज वाल्मीकि स्वतंत्र पत्रकार हैं अैर सफाई कर्मचारी आंदोलन से जुड़े हैं।)